बुधवार, जनवरी 05, 2005

बम्बई मेरी जान

कुछ दिनों पहले सुकेतू मेहता की क़िताब maximum-city पढी तो बम्बई की यादें ताज़ा हो गईं. अपने कालेज के दिनों में मुझे बंबई के प्रति ज़बरदस्त आकर्षण था. जब भी किसी बातचीत में बंबई का नाम आता था तो मेरे चहरे पे एक ख़ास क़िस्म की मुस्कान आ जाती थी जैसे की किसी ने मेरी स्वपन नगरी का नाम ले लिया या फिर मेरे मन की बात कह दी हो. कालेज की पढ़ाई ख़त्म होने के बाद मैं अपना बोरिया बिस्तर ले के अपनी कर्मभूमि बंबई में पहुँच गया.

बंबई के एक सुदूर उपनगर में मैं अपने एक रिश्तेदार के यहां रहता था. मैंने नौकरी ढूंढना शुरू कर दी. और बंबई की लोकल ट्रेनों में मेरी आवाजाही शुरू हो गई. ६ महीने के शुरूआती संघर्ष के बाद मुझे एक बहुत ही अच्छी नौकरी मिल गई और इस तरह से बंबई के साथ मेरा रोमांटिक अफ़ेयर शुरू हो गया.

मुझे बंबई की ज़िन्दगी रास आने लगी और मैं बंबईया रंग में डूबने लगा. शुरू शुरू में बंबई की हर शै मस्त लगती थी, ट्रेनों मे भजन मंडली गाते लोग , बंबईया हिन्दी बोलते लोग , हर वक़्त व्यस्त रहने वाले लोग, घूमने की जगहें जैसे गेटवे आफ़ इंडिया, जूहू बीच , चौपाटी बीच , मछलीघर आदि. तरह तरह के रेस्टारेन्ट और पब्स. मेरे दिन हंसीख़ुशी में गुज़र रहे थे. इन दिनों मेरे दिल में इस तरह के विचार आते थे.

न जाने क्या बात है , बम्बई तेरे शबिस्तां में
कि हम शामे-अवध, सुबहे-बनारस छोड़ के आ गये

लेकिन धीरे धीरे हालात बदलने लगे या फिर मेरा नज़रिया बदलने लगा. कुछ तो आफ़िस में काम का प्रेशर , कुछ commuting की थकान , कुछ मेरी सेहत की बदहाली , कुछ बंबई की भागदौड़ वाली ज़िन्दगी इन सब चीज़ों ने मेरा जीवन मुश्किल कर दिया. जैसे जैसे ३‍ ४ साल गुज़रे बंबई से मेरा मोहभंग होता गया और मुझे बंबई के जीवन से घ्रणा और डर लगने लगा. चारों तरफ़ भीड़, गन्दगी , भागदौड़ , ग़रीबी और मारामारी ये सब देखकर मेरे अंदर घबराहट सी पैदा हो जाती थी और मेरे हौसले पस्त होने लगे थे. मुझे अपनी हालत 'गमन' फ़िल्म के हीरो की तरह लगती जो बंबई मे परेशानहाल होके ऐसे कहता है.

सीने में जलन , आंखों में तूफ़ान सा क्यों है
इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है

आज़ भी हलांकि मैं एक तरह से बंबई के नाम से घबराता हूं या फिर नफ़रत करता हूं,लेकिन फिर भी मेरे दिल का कोई कोना अभी भी बंबई से जुड़ा हुआ महसूस करता है बिल्कुल ऐसे जैसे आदमी अपने पहले प्यार को कभी भुला नहीं पाता है.

Comments:
किसी ने अर्ज किया है:-

जब वो बेवफा है तब उस पर दिल इतना मरता है,
इलाही गर वो बावफ़ा होता तो क्या सितम होता.

बंबई से नफरत है तब ये हाल है .अगर खाली प्यारहोता तो क्या हाल होता .
 
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